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महिलाओं को कब Tdap का टीका लगवाना चाहिà¤
जिन महिलाओं को Tdap का टीका लग चà¥à¤•ा होता है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ हर पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी पर Tdap का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है। हालांकि Tdap का टीका पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान कà¤à¥€ à¤à¥€ लगवाया जा सकता है, लेकिन इसे लगवाने का सही समय है 27वें से लेकर 36वें हफà¥à¤¤à¥‡ के बीच का, जिसमें मां के शरीर का à¤à¤‚टी बॉडी रेसपॉनà¥à¤¸ सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है और à¤à¤‚टी बॉडीज गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠमें जाती हैं। आदरà¥à¤¶ रूप में TT के पहले डोज को दूसरे टà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤®à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° में Td से बदल देना चाहिठऔर उसके बाद इसे Tdap से बदल देना चाहिà¤à¥¤ अगर यह वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ नवजात शिशॠके गरà¥à¤ में कम से कम 20 हफà¥à¤¤à¥‡ पूरे होने के होने के बाद दे दी जाती है, तो बचà¥à¤šà¥‡ में इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ की आशंका बहà¥à¤¤ कम हो जाती है। अगर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान यह वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ नहीं लगती, तो शिशॠके पैदा होने के बाद तà¥à¤°à¤‚त ही ये वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ बचà¥à¤šà¥‡ को लग जानी चाहिà¤à¥¤
Tdap वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ लगवाने के अचà¥à¤›à¥‡ मिले हैं नतीजे
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को यह सलाह दी जाती है कि वे अपनी पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के बाद वाले चरण में या फिर पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® के दौरान वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ लगवा लें। इससे बचà¥à¤šà¥‡ से फिजिकल कॉनà¥à¤Ÿà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ में आने से दो हफà¥à¤¤à¥‡ पहले महिलाà¤à¤‚ वैकà¥à¤¸à¤¿à¤¨à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ हो जाती हैं, जिससे बचà¥à¤šà¥‡ को Pertussis होने की आशंका नहीं रहती। Tdap वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ से नवजात शिशà¥à¤“ं में Pertussis रोकने में सफलता हासिल हà¥à¤ˆ है। साथ ही इससे नवजात शिशॠके हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤²à¤¾à¤‡à¤œà¥‡à¤¶à¤¨ और Pertussis के कारण होने वाले गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बचाव में à¤à¥€ कामयाबी मिली है।
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